कठोर से कठोर ह्र्दय को भी कोमल बनाया जा सकता है

निम्नलिखित गद्दीयांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नोें (71-75) के उत्तर चुनिए :
धरातल युद्ध से की विभीषिकाओं को सदा-सदा के लिए समाप्त करने के लिए गाँधीजी ने विश्व को अहिंसा रूपी अस्त्र प्रदान किया । गाँधीजी कहा करते थे कि प्रेम और अहिंसा के द्वारा विश्व के कठौर से कठौर हृदय को भी कोमल बनाया जा सकता है। उन्होंने इन सिद्धांतों का परीक्षण भी किया और वे ‘नितान्त’ सफल सिद्ध हुए। हिंसा से हिंसा बढ़ती है ‘घृणा’, घृणा को जन्म देती है और प्रेम से प्रेम की अभिवृद्धि होती है। अत: यह निश्चित है बिना प्रेम और अहिंसा के विश्व में शान्ति स्थापित नहीं हो सकती। शांति के अभाव में मानव जाति का विकास संभव नहीं। प्रत्येक राष्ट्र का स्वर्णिम युग वही कहा जाता है, जबकि वहाँ पूर्ण शान्ति और सुख रहा हो तथा उत्तमोत्तम रचनात्मक कार्य किए जाते हों। भौतिक दृष्टि से व्यापार और कृषि की उन्नति भी शांतिकाल में ही सम्भव होती है, अत: हम यदि विश्व का कल्याण चाहते हैं तो हमें युद्ध का बहीष्कार करना ही होगा। अहिंसा और प्रेम की भावना से विश्व में शान्ति स्थापित करनी होगी, तभी विश्व में सुखमय एंव शान्तिमय राज्य की स्थापना सम्भव होगी।
प्रश्न.: कठोर से कठोर ह्र्दय को भी कोमल बनाया जा सकता है

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