“अब लौ नसानी अब नसैहों” में कौन-सा रस है?
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Detailed Solution & Logic
Correct Answer:
शांत
**"अब लौ नसानी अब नसैहों"** पद सूरदास द्वारा रचित है। इसमें सांसारिक मोह का त्याग कर ईश्वर की शरण ग्रहण करने की भावना व्यक्त की गई है। इसलिए इसमें **शांत रस** की प्रधानता है।
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